Wednesday, April 29, 2026

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साहित्यकार जगदीश बरनवाल चेतना सम्मान से हुए सम्मानित

गाजीपुर। साहित्य चेतना समाज’ के 40वें स्थापना-दिवस पर नगर के वंशीबाजर स्थित एक पैलेस में कवि-सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस मौके पर आजमगढ़ के वरिष्ठ साहित्यकार जगदीश बरनवाल ‘कुंद’ को ‘चेतना सम्मान’ से सम्मानित किया गया। अध्यक्षता वरिष्ठ गीतकार डा.ईश्वरचन्द्र त्रिपाठी ने की । कार्यक्रम का शुभारम्भ मां सरस्वती के पूजन-अर्चन एवं दीप-प्रज्वलन से हुआ। चंदौली की कवयित्री रीना तिवारी की सरस्वती वन्दना के उपरान्त संस्था के संस्थापक अमरनाथ तिवारी ‘अमर’ ने आगंतुकों का वाचिक स्वागत किया। चेतना सम्मान’ से सम्मान से सम्मानित रचनाकार जगदीश बरनवाल ‘कुंद’ ने साहित्य, संस्कृति, समाज एवं राष्ट्र की, समर्पण भाव से निस्पृह सेवा करने वाली इस संस्था की प्रशंसा की और समाज एवं राष्ट्र को सही दिशा देने में साहित्य की महती भूमिका को रेखांकित किया। मुख्य अतिथि अपियम फैक्ट्री के महाप्रबंधक दौलत कुमार ने कहा कि “साहित्य चेतना समाज के इस कार्य को आने वाला समय स्वर्णाक्षरों में रेखांकित करेगा। ऐसी संस्थाऍं समय-समय पर अपने कार्य द्वारा सामाजिक चेतना में स्तरोन्नयन के साथ ही व्यक्ति-व्यक्ति में पुष्कल राष्ट्रहित-चेतना जागृत करतीं हैं। चंदौली के कवि कृष्णा मिश्रा के मुक्तकों को श्रोताओं ने खूब प्रशंसित किया “अपनो से कभी जीत करके हारना भी है/फिर हार करके जीतने का नाम ज़िन्दगी”। चंदौली की गीत की कवयित्री रीना तिवारी ने “यूं तो दुनिया में अपने बहुत हैं मगर/मां से बढ़कर जमाने में कोई नहीं” सुनाकर अतिशय प्रशंसा अर्जित की। देवरिया के हास्य-व्यंग्य के कवि रुद्रनाथ त्रिपाठी ‘पुंज’ ने “जय हो पत्नी,जय हो पत्नी/मेरे बच्चों की माता” सुनाकर ख़ूब वाहवाही बटोरी। वाराणसी की कवयित्री विदुषी साहाना ने अपना गीत “उन्मुक्त नयन के दर्पण में मैंने तेरी छवि उतार ली, बेगूसराय के ग़ज़ल-गो मासूम राशदी ने “ये हमसे पूछिए क्या-क्या फ़रोख़्त करना पड़ा/बड़े से शहर में छोटे से एक घर के लिए” ,बलिया के कवि शशिप्रेमदेव ने अपनी ग़ज़ल “घर में आज भले ही मेरे जगह ना हो उसकी कोई/मेरे अन्दर लेकिन अब भी पहले से ज्यादा है वो” ,बलिया के कवि श्वेतांक सिंह, डॉ.नवचन्द्र तिवारी, वाराणसी के कवि राजकुमार ‘आशीर्वाद’ ने अपने काव्यपाठ से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। अन्त में अध्यक्षीय काव्यपाठ करते हुए आजमगढ़ के वरिष्ठ गीतकार डॉ.ईश्वरचन्द्र त्रिपाठी ने “सिकन्दर बन के जो इन बस्तियों पर कहर बरपाये/उन्हें सुकरात कहता हं मुझे कुछ हो गया है क्या”। इस अवसर पर संस्था के अध्यक्ष डा.रविनन्दन वर्मा,सचिव हीरा राम गुप्ता, उपाध्यक्ष संजीव गुप्त, कोषाध्यक्ष राजीव मिश्र, राघवेन्द्र ओझा,विपिनबिहारी राय,अमित राज, पंकज राय, अर्चना तिवारी,डॉ.अरविन्द दूबे, अमरनाथ सिंह, डॉ.पी.एन.सि़ह, डॉ.रमाशंकर लाल, डॉ.अम्बिका पाण्डेय,प्रो.अमरनाथ राय, डॉ.राजेन्द्र सिंह राजपूत, कृष्णबिहारी राय, विनोद अग्रवाल,सहजानन्द राय,आनन्द प्रकाश अग्रवाल, नागेश मिश्र, हरिशंकर पाण्डेय, दिनेशचंद्र शर्मा, डॉ.सन्तोष कुमार तिवारी,गोपाल गौरव, आकाश विजय त्रिपाठी, आशुतोष श्रीवास्तव, संगीता तिवारी,शालिनी श्रीवास्तव,सीमा सिंह, रागिनी त्रिपाठी, सुमनलता गुप्त,डा.विनीता राय,वीरेन्द्र चौबे, विद्युत प्रकाश,लालजी गुप्ता,आदि उपस्थित रहे। संचालन नवगीतकार डॉ.अक्षय पाण्डेय ने एवं कवि-सम्मेलन का संचालन हास्य-व्यंग्यकार डॉ.नागेश शाण्डिल्य ने किया। संस्था के संगठन सचिव प्रभाकर त्रिपाठी ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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