
गाजीपुर। साहित्य चेतना समाज एवं भारत डायलॉग्स के संयुक्त तत्वावधान में हिन्दी दिवस पर डीएवी इण्टर कालेज में विचार-गोष्ठी एवं कवि-गोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण-पुष्पार्चन व दीप प्रज्वलन से हुआ।सभी का स्वागत विद्यालय के प्रबंधक आदित्य प्रकाश ने किया। भारत डॉयलॉग्स के सह-संस्थापक एवं सीईओ विवेक सत्य मित्रम् ने कहा कि ज़िले में 8-9 नवंबर को होने वाले अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम “गाज़ीपुर लिटरेचर फेस्टिवल” के दौरान ज़िले के विभिन्न स्कूलों एवं कॉलेजों के छात्रों द्वारा गायन, नृत्य, एवम् वाद्ययंत्र पर संगीत की एकल एवम् सामूहिक प्रस्तुतियाँ होंगी साथ ही जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में स्थानीय कलाकारों, गायकों, साहित्यकारों, नाट्य कलाकारों एवं कवियों द्वारा गाज़ीपुर लिटरेचर फेस्टिवल के निमित्त सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी जाएगी। जिसका मकसद लिटरेचर फेस्टिवल के बारे में जागरूकता फैलाना है। हिन्दी दिवस पर उन्होंने कहा कि “पिछले 15-20 सालों में हुई इंटरनेट और मोबाइल क्रांति से हिन्दी भाषा अप्रत्याशित रूप में मजबूत हुई है और इसका आर्थिक महत्त्व भी बढ़ा है। पीजी.कालेज के अर्थशास्त्र विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डा.श्रीकांत पाण्डेय ने कहा कि “14 दिसंबर 1949 को संविधान सभा में मात्र एक अतिरिक्त वोट से हिंदी को राजभाषा की स्वीकृति दी गई और अंग्रेजी को अगले 15 साल तक सह राजभाषा का दर्जा दिया गया।अतः 1953 से हम हिंदी दिवस के रूप में 14 नवंबर को मनाते है। हिंदी भाषा आज धीरे धीरे पूरे हिंदुस्तान की भाषा बन गई है। हमें सांस्कृतिक, सामाजिक, राजनीतिक रूप में एक सूत्र में जोड़ने की। इसमें क्षमता है। हिंदी भाषा का भविष्य बहुत उज्ज्वल है। अभी यह भाषा प्रवाहमान है, लोक भाषा से लेकर विभिन्न भाषाओं को आत्मसात कर समृद्ध हो रही है।” इनके अतिरिक्त चंदन वागीश एवं बालेश्वर पाण्डेय ने अपने विचार व्यक्त किए। काविगोष्ठी के क्रम में हिन्दी पर आधारित नवगीतकार डा.अक्षय पाण्डेय ने अपना नवगीत “सिर पर पल्लू मर्यादा का/ है यह जीवन-धन/मां जैसी है हिन्दी/ इसको झुककर करो नमन।” की सस्वर प्रस्तुति ने अतीव प्रशंसा अर्जित की। कामेश्वर द्विवेदी ने “यह लेना होगा संकल्प कि सब अवरोध मिटाऍंगे हम/राष्ट्रभाषा जबतक न बनेगी चुप न रहेंगे लक्ष्य यही है” गीतकार हरिशंकर पाण्डेय ने “अधूरा हर शृंगार बिन बिन्दी के होता है/हमारे देश में अपमान क्यों हिन्दी का होता है” दिनेशचन्द्र शर्मा ने “ऐ चमन के रखवाले अपने विचारों से/हर गुंचो को हिन्दी के चिराग़ से प्रज्वलित कर देना” ग़ज़ल-गो कुमार नागेश, वरिष्ठ व्यंग्यकार अमरनाथ तिवारी ‘अमर’, युवा शायर गोपाल गौरव, व्यंग्य के युवा कवि आशुतोष श्रीवास्तव, डॉ. सन्तोष कुमार तिवारी, अवनीश प्रताप सिंह एवं युवा कवि मनोज यादव, ने अपने सरस काव्यपाठ से इस संगोष्ठी की गरिमा को महत्तर उत्कर्ष प्रदान करते हुए उपस्थित श्रोताओं को रससिक्त कर दिया।कार्यक्रम में संगठन सचिव प्रभाकर त्रिपाठी,डा.पारसनाथ सिंह, डॉ.ऋचा राय, उग्रसेन सिंह,विपिन बिहारी राय, संजीव गुप्त, संजीव श्रीवास्तव, प्रवीण तिवारी,उमेश राय, राघवेन्द्र ओझा, शिवम् प्रकाश त्रिपाठी,आनन्द अग्रवाल, अफसर खान, जितेन्द्र कुमार आदि उपस्थित थे। अध्यक्षता डी.ए.वी.इण्टर कालेज के प्रबन्धक आदित्य प्रकाश अग्रवाल तथा धन्यवाद ज्ञापन संस्थापक अमरनाथ तिवारी अमर ने किया।




