
दुल्लहपुर (गाज़ीपुर)। “सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-क़ातिल में है।”देशभक्ति की इन्हीं भावनाओं के बीच बुधवार को दुल्लहपुर के धामूपुर गांव स्थित शहीद पार्क में परमवीर चक्र विजेता शहीद वीर अब्दुल हमीद का 60वां शहादत दिवस मनाया गया। सुबह 8 बजे उपजिलाधिकारी अतुल कुमार, सीओ चोब सिंह, बीडीओ भीमराव प्रसाद, समाजसेवी निजामुद्दीन सिद्दीकी और आयोजक परवेज अहमद की अगुवाई में कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। शहीद पार्क में आयोजित सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में कई विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने राष्ट्रभक्ति गीत, नृत्य और नाट्य मंचन से दर्शकों को भावविभोर कर दिया। आज़मगढ़ सांसद धर्मेंद्र यादव मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे। युवाओं का उत्साह इतना प्रबल था कि मंच तक पहुंचने में उन्हें धक्का-मुक्की का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि “मैं शहीद अब्दुल हमीद की धरती पर आकर धन्य महसूस कर रहा हूं। शहीदों की शहादत कभी व्यर्थ नहीं जाती। सपा की सरकार बनी तो अग्निवीर योजना समाप्त होगी और युवाओं को न्याय मिलेगा।”उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि शहीद के नाम से दुल्लहपुर से एक ट्रेन चलाने की मांग को संसद में उठाया जाएगा।

पूर्व मंत्री शादाब फातिमा ने कहा कि 1965 के युद्ध में शहीद अब्दुल हमीद ने पाक-अमेरिकी मंसूबों को ध्वस्त कर दिया था। विधायक जै किशन साहू ने गाज़ीपुर को शहीदों की धरती बताते हुए कहा कि यहां के पराक्रम को विश्व पटल पर सुनहरे अक्षरों में लिखा जाता है।एमएलसी गुड्डू जमाली ने युवाओं से नफरत और जातिवाद की राजनीति से दूर रहकर शहीद से प्रेरणा लेने की अपील की। स्नातक एमएलसी आशुतोष सिन्हा ने कहा कि युवाओं को शिक्षा, खेल और राष्ट्रसेवा के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहिए।कार्यक्रम में आए अतिथियों का स्वागत और सम्मान शहीद के बड़े पुत्र जैनुल अहमद ने अंगवस्त्र और स्मृति चिन्ह भेंट कर किया। इस अवसर पर विधायक डा. वीरेंद्र यादव, पूर्व विधायक त्रिवेणी राम, लालजी यादव प्रबंधक, सपा नेता मनीष साहू, विजय बहादुर यादव, प्रदेश सचिव कैप्टन जयवीर यादव, प्रबंधक बृजेश कुशवाहा, केशव यादव, गरीब राम संतोष यादव राम नगीना यादव नंदलाल यादव अवधेश यादव संतोष यादव सांसद प्रतिनिधि बलराम पटेल समेत हजारों की भीड़ मौजूद रही। 60वें शहादत दिवस का यह भव्य आयोजन इस बात की गवाही देता है कि वीर अब्दुल हमीद का नाम और उनका बलिदान सदियों तक युवाओं के लिए देशभक्ति और सरहद की हिफ़ाज़त का प्रेरक मंत्र बना रहेगा। अंत में शहीद के बड़े पुत्र जैनुल हसन, आयोजक परवेज अहमद, समाजसेवी निजामुद्दीन सिद्धकी, संजीत प्रजापति ने आए हुए लोगों का आभार जताया।




