
गाजीपुर। आल इंडिया पयामे इंसानियत फोरम की ओर से 23 मई को ग़ाज़ीपुर सिटी रेलवे स्टेशन पर दूर-दराज़ इलाको से आए मुसाफिरों,आगंतुकों और फुटपाथ पर जिंदगी गुजारने वाले लोगों को खाना खिलाया । संयोजक नजमुस्साकिब अब्बासी ने कहा कि लोगों के दुःख दर्द में काम आना ही सच्ची इंसानियत है। आड़े वक़्त काम आने का भी नाम इंसानियत है,ज़रूरत है कि आज कमज़ोर होती इंसानियत का हाथ थामा जाए,उसके सुख-दुःख में शामिल हुआ जाय। इसी क्रम में हम लोगों ने हर सप्ताह रेलवे स्टेशन पर ज़रूरतमंदों को खाना खिलाने का सिलसिला शुरू किया है।मआरिफ अब्दुल्लाह ने कहा कि हमें इंसानियत की खिदमत का जहाँ भी मौक़ा मिले उसे अपना सौभाग्य समझना चाहिए।इसलिए भोजन कराने वाली ये सेवा हम निरंतर करते आ रहे हैं।तारिक़ नसीम अब्बासी ने कहा कि हमारे समाज में माना जाता है कि इंसानों को रब की तरफ से जो सबसे बड़ी नेमत मिली है वह इंसानियत है,अगर ये नेमत और दौलत किसी को मिल गई तो वह सोसाइटी का सबसे धनवान आदमी माना जायेगा,। शाहनवाज सिद्दीकी ने कहा कि आज मानवता संकट में है तो ऐसे में ज़रूरत है कि समाज के बीच जाकर उनमें मानवता का संचार किया जाय और उनके दुःख-दर्द में शामिल होकर उनकी तकलीफों को दूर किया जाय। अरमान अंसारी ने कहा कि आज समाज में जो विघटन और तोड़ है उसे जोड़ने के लिये मानवता के कार्यों से समाज को संबद्ध करना ज़रूरी है मुहम्मद सैफ ने कहा कि परेशान हाल लोगों की सेवा करने से सच्ची ख़ुशी मिलती है। दानियाल अहमद ने कहा कि यदि हम लोग ऐसे ही निस्वार्थ भाव से मानवता की सेवा करते रहे तो एक दिन हम देश में एक बेहतर समाज की स्थापना करने में सफल होंगे।अच्छे लाल कुशवाहा ने मानवता को बढ़ावा देने के लिए ही हम लोगों ने भुखमरी से लोगों को निजात दिलाने के लिए ये अभियान शुरू किया है।




