Friday, May 1, 2026

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क्रिकेट प्लेयर एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने सौंपा ज्ञापन

गाजीपुर। क्रिकेट प्लेयर एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने रजिस्ट्रार ऑफ कम्पनीज कानपुर से औपचारिक भेंट की और प्रदेश के खिलाड़ियों से जुड़ी गंभीर समस्याओं से अवगत कराया। प्रदेश अध्यक्ष अरविंद सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन प्राइवेट लिमिटेड को वर्ष 2005 में सोशल चिटफंड द्वारा ब्लैकलिस्ट कर दिया गया था। इसके उपरांत उक्त संस्था ने रजिस्ट्रार ऑफ कम्पनीज, कानपुर को भ्रामक जानकारी देकर गलत तरीके से मान्यता प्राप्त की, जो कि कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 8(11) के अंतर्गत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है।उन्होंने कहा कि उक्त संस्था ने राज्य सरकार से नाम उपयोग की पूर्व अनुमति नहीं ली, जो स्पष्ट रूप से नियमों का उल्लंघन है। अतः मांग की गई कि उक्त संस्था की मान्यता तत्काल प्रभाव से रद्द की जाए या उसके नाम से “उत्तर प्रदेश” को हटाया जाए।प्रदेश सचिव श्री प्रतीक शुक्ल और श्री शिवाकांत यादव ने बताया कि वर्तमान में संस्था में 70 वर्ष से अधिक आयु के निदेशक कार्यरत हैं, जो सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन हैं। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि कोई भी पदाधिकारी अधिकतम 9 वर्ष तक ही कार्य कर सकता है।महिला पदाधिकारियों में प्राची पांडे और दिव्या सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं, परंतु उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन प्राइवेट लिमिटेड ने केवल 40 जिलों को ही मान्यता प्रदान की है, शेष 35 जिले इस प्रक्रिया से बाहर हैं। क्रिकेट प्लेयर एसोसिएशन ने मांग किया है कि 15 दिनों के भीतर इस पूरे प्रकरण की जांच पूर्ण कर संस्था की मान्यता रद्द की जाए, ताकि उत्तर प्रदेश के खिलाड़ियों के उज्ज्वल भविष्य को सुरक्षित किया जा सके।

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