Thursday, July 23, 2026

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डा.अवधेश प्रधान ने गाजीपुर के काव्य-साहित्य का इतिहास’ पुस्तक किया विमोचन

गाजीपुर। साहित्य चेतना समाज की ओर से रामलीला मौदान सभागार में मुख्य अतिथि बीएचयू के हिन्दी विभाग के सेवानिवृत्त प्रोफेसर डा.अवधेश प्रधान ने डा.गजाधर शर्मा ‘गंगेश’ की पुस्तक ‘गाजीपुर के काव्य-साहित्य का इतिहास’ का विमोचन किया। अतिथियों का वाचिक स्वागत संस्था के संस्थापक अमरनाथ तिवारी ‘अमर’ ने किया। डॉ. गजाधर शर्मा गंगेश ने कहा कि तमाम परेशानियों के बावजूद मैंने काव्य-इतिहास पूरा किया। जिससे गाजीपुर की उर्वरा साहित्यिक भूमि की फसलें लोगों के समक्ष आ सकें। यह पूर्वजों को मेरी श्रद्धांजलि है और नए लोगों को इतिहास और साहित्य के क्षेत्र में कार्य करने के लिए आह्वान करती है। माधव कृष्ण ने कहा कि डॉ.गंगेश ने निरपेक्ष रहते हुए ४२८ कवियों को और लगभग ६०० वर्षों की साहित्यिक चेतना के इतिहास को संकलित करने का दु:साध्य कार्य किया है। प्रो.आनंद सिंह ने कहा कि डा.गंगेश ने पूर्ववर्ती कार्यों को आधार बनाकर साहित्य इतिहास को विस्तार दिया। इस तरह से वह भूत और वर्तमान के मध्य एक सेतु का कार्य किया है। ओम धीरज ने कहा कि अनेक ऐसे कवि हैं जिनकी पुस्तकें अनुपलब्ध हैं, ऐसे कवि भी इस पुस्तक में आने के बाद अब विस्मृत नहीं होंगे।डॉ.रामबदन राय ने कहा कि इस संकलन से भीखा साहब और मंगरू कवि जैसे लोगों का परिचय मिलता है जो मुझे अन्यत्र नहीं मिला। प्रो.अवधेश प्रधान ने कहा कि साहित्य ने इस देश को संस्कार की पहचान दी है कि यह देश कैसे बोलता है. शब्द में अर्थ आचरण से आता है।

एक विभाग था जिसे अंग्रेजों ने शुरू किया था और वह 1978 तक चला आया। वह विभाग हर जनपद के विषय में सब कुछ लिखते थे, क्योंकि जिन पर शासन करना है उनके विषय में जानना चाहिए। इस परम्परा को गंगेश ने आगे बढाया है।हमारे कवियों ने इस देश का निर्माण किया है। जैसे तुलसी ने श्रीराम दिया और वेदव्यास ने श्रीकृष्ण को दिया। भोलानाथ त्रिपाठी विह्वल’ ने कहा कि कृति का लोकार्पण कृतिकार की पुत्री के विवाह के समान होता है। गंगेश ने दुर्धर्षपूर्ण परिस्थितियों में इस कृति को चुना है जिसके लिए वह धन्यवाद के पात्र हैं। शेषनाथ राय, डॉ अजीत कुमार राय, राजेन्द्र सिंह ,डॉ.कमलेश राय ,रामबचन यादव बेराही ,प्रो.विजय शंकर मिश्र ‘ज्योतिपुंज’ ,डॉ रविनंदन सिंह डॉ. देवेन्द्र ,हिमांशु उपाध्याय ,डा.रविनन्दन वर्मा,डा.संतोष सिंह,हीरा राम गुप्ता,डा.व्यासमुनि राय,राजीव मिश्र,नागेश मिश्र,आनन्द प्रकाश अग्रवाल,डा.श्रीकान्त पाण्डेय,मुक्तेश्वर श्रीवास्तव,सुहैल खाँ,गिरीश शर्मा,आशुतोष श्रीवास्तव,शिवम प्रकाश त्रिपाठी,डा.युद्धिष्ठिर तिवारी,श्यामनगर,डा.दिनेश सिंह,डा.प्रतिभा सिंह,डा.पारसनाथ सिंह,विपिन बिहारी राय,मृत्युंजय राय,अलका त्रिपाठी,संजीव श्रीवास्तव आदि उपस्थित थे। अध्यक्षता भोलानाथ त्रिपाठी विह्वल तथा संचालन साहित्य चेतना समाज के उपाध्यक्ष संजीव गुप्त एवं धन्यवाद ज्ञापन संस्थापक अमरनाथ तिवारी ‘अमर’ ने किया।

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