Thursday, April 30, 2026

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इंसान था या कागज का पुलिंदा ,राशन कार्ड में मर गया, आधार में था जिंदा

गाजीपुर। डॉक्टर जितेंद्र पाठक की प्रथम पुण्यतिथि उनके निवास रवींद्रपुरी में मनाई गई l विशिष्ट अतिथि पीजी कॉलेज के मनोविज्ञान विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष अध्यक्ष डॉ अंबिका पांडेय ने कहा कि पाठक जी गाजीपुर के साहित्य आकाश के सूर्य थे। उन्होंने पाठक जी की कविता ‘सीता विषाद ‘की चर्चा की । हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष विनय कुमार दुबे ने बताया कि पाठक जी के साहित्य के ऊपर वो एक शोध कार्य भी करवा रहे हैं।. संस्कृत विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ समरेंद्र मिश्रा ने कहा कि डॉक्टर जितेंद्र नाथ पाठक ने स्त्री के चरित्र को नई ऊंचाई दीl’ शाम ‘कविता के माध्यम से उन्होंने अद्भुत प्रकृति चित्रण किया lडॉ संतोष कुमार तिवारी ने कहा कि’ कुछ लोग हैं जो वक्त के सांचे में ढल गए । कुछ लोग हैं जो वक्त के सांचे बदल गए । इस अवसर पर गणित विभाग के पूर्व विभाग अध्यक्ष डॉ रमाशंकर सिंह ने कहा कि ‘अतीतजीवी और काल ‘रचना डॉक्टर जितेंद्रनाथ पाठक की कालजयी रचना है और इस रचना के लिए उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार मिलना चाहिए था। पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ दिनेश सिंह ने पाठक जी को एक श्रेष्ठ कवि, कहानीकार ,आलोचक और निबंधकार बताया ।पाठक जी की पुत्री डॉक्टर कल्पना पांडेय ने बिंबों और प्रतीकों से भरी हुई एक कविता के माध्यम से अपने पिता को याद किया । अध्यक्षता करते हुए साहित्यकार पूर्व प्राचार्य डा.मांधाता राय ने कहा कि पाठक जी एक महान साहित्यकार थे और उन्होंने गाजीपुर में एक साहित्यिक पीढ़ी का निर्माण करने में अभूतपूर्व योगदान किया । इस अवसर पर एक काव्य गोष्ठी का अभियान आयोजन हुआ। कवि दिनेश चंद्र शर्मा ने पाठक जी को याद करते हुए अपनी एक कविता सुनाई ‘”वर्षों बीत गए आपको गंगा में समाहित हुए। गजलकार गोपाल गौरव ने सुनाया “फंस गए मजधार आखिर किस लिए ?हाथ में पतवार आखिर किस लिए? तू मोहब्बत का पुजारी है अगर? हाथ में तलवार आखिर किस लिए?। आशुतोष श्रीवास्तव ने अपनी व्यंग्य रचना सुनाई “इंसान था या कागज का पुलिंदा ,राशन कार्ड में मर गया, आधार में था जिंदा। अपने घर का ,न घाट का ,वह बन गया खरबंदा। साहित्य चेतना समाज के संस्थापक अमरनाथ तिवारी ‘अमर ‘ने “जाऊं विदेश तो किस देश ?बहुत सोचा, दिमाग दौड़ाया,अंत में अपना देश ही भाया” सुनाया ।संचालन डॉ संतोष कुमार तिवारी और अध्यक्षता डॉ मांधाता राय ने किया।

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