
गाजीपुर। साहित्य चेतना समाज’ की ओर से ‘चेतना -प्रवाह’ कार्यक्रम के तहत, संस्थापक अमरनाथ तिवारी ‘अमर’ के स्वामी विवेकानन्द कालोनी’ स्थित आवास पर कई श्रेष्ठ काव्यसंग्रहों की रचयिता एवं दसाधिक पुरस्कार-सम्मानों से सम्मानित कवयित्री अलका त्रिपाठी ‘विजय’ के आगमन पर एक सरस काव्यगोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी का शुभारंभ कवि संजय पाण्डेय की वाणी-वंदना से हुआ। संजय पाण्डेय,संजू पाण्डेय एवं संस्था के संगठन सचिव प्रभाकर त्रिपाठी के अनुगायन की सांगीतिक प्रस्तुति ने उपस्थित समस्त जन को आनन्द-विभोर कर दिया। युवा शायर गोपाल गौरव ने अपनी ग़ज़ल “ज़िन्दगी में ज़िन्दगी भर ज़िन्दगी के वास्ते/हम भटकते ही रहे इक रौशनी के वास्ते/प्यार ही बस प्यार हो ऐसी कोई तरकीब कर/गोलिया,बारूद मत रख आदमी के वास्ते” सुना कर खूब वाहवाही लूटी। आशुतोष श्रीवास्तव ने अपनी व्यंग्य- कविता ”आज कमाने में रोटी, है सरक जाती लंगोटी/आज भाई को भाई कहां खिला पा रहा है रोटी ” सुना कर सोचने पर मजबूर किया। युवा नवगीतकार डा.अक्षय पाण्डेय ने अपना नवगीत “झिलिंगी खटिया पर कोने में सोने लगे पिता/धीरे-धीरे अप्रासंगिक होने लगे पिता” की सस्वर प्रस्तुति ने श्रोताओं को तालियां बजाने के लिए विवश किया। रिष्ठ व्यंग्यकार अमरनाथ तिवारी ने अपनी कविता “आगे बढ़ते उत्साही को/कब रोक सकीं दुर्गम राहें/मंज़िल ख़ुद उसे बुलाती है /फैला करके दोनों बाहें” खूब प्रशंसित हुई। संजय पाण्डेय ने अपना गीत “आ तुझे मैं प्यार करूं और तू कुछ ना बोले” ने प्रशंसा अर्जित किया। गीतकार हरिशंकर पाण्डेय अपना भोजपुरी गीत “कहनी शुरू बाटे, बेटी बेटी-महतरिया/रोटिया बनीं कहिया हो/होत भिनसरवे घनघनाएले मोबाइल/काम-धाम छोड़ि के धियवो पराइल” प्रस्तुत कर ख़ूब तालियां बटोरी। अलका त्रिपाठी ‘विजय’ ने अपनी कई कविताऍं प्रस्तुत की, वर्तमान वैश्विक सामरिक स्थिति पर रचित गीत “अब समर की कहानी लिखी जाएगी/हर अमर की कहानी लिखी जाएगी” विशेष प्रशंसित रहा। इस मौके पर कन्हैया गुप्त ,कवि दिनेशचन्द्र शर्मा ,कुमार नागेश, राघवेन्द्र ओझा,अंकुर,अंकित,आशुतोष पाण्डेय, अंशुल त्रिपाठी,संगीता तिवारी, राकेश श्रीवास्तव आदि उपस्थित रहे। । संस्था के संगठन सचिव प्रभाकर त्रिपाठी ने आगंतुक कवियों एवं श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। कवि-गोष्ठी की अध्यक्षता कामेश्वर द्विवेदी एवं संचालन डॉ.अक्षय पाण्डेय ने किया।




