Saturday, June 27, 2026

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स्वामी सहजानंद केवल किसान नेता नहीं थे, बल्कि भारत के सामाजिक पुनर्जागरण के अग्रदूत थेः अतुल राय

गाजीपुर। स्वामी सहजानंद सरस्वती स्मृति न्यास, की ओर से स्वामी सहजानंद पीजी कालेज सभागार में राष्ट्रऋषि, किसान नेता एवं समाज सुधारक स्वामी सहजानंद सरस्वती की 76वीं पुण्यतिथि मनाई गई। इस अवसर पर श्रद्धांजलि सभा एवं “आज के परिवेश में स्वामी सहजानंद सरस्वती के विचारों की प्रासंगिकता” विषय पर विचार गोष्ठी की गई। माधव कृष्ण ने कहा कि आज जब समाज वैचारिक ध्रुवीकरण और कट्टरता की ओर बढ़ रहा है, तब स्वामी सहजानंद सरस्वती का सबसे बड़ा संदेश स्वतंत्र चिंतन और विवेकपूर्ण संवाद है। उन्होंने धर्म, वेदांत और सामाजिक न्याय के विचारों को परस्पर विरोधी नहीं, बल्कि पूरक माना। स्वामी जी ने गीता के लोकसंग्रह और निष्काम कर्म को किसानों, मजदूरों और वंचितों के अधिकारों के लिए संघर्ष का नैतिक आधार बनाया। उनका जीवन बताता है कि सच्चा अध्यात्म समाज के दुःख से विमुख नहीं होता, बल्कि अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा देता है।मुख्य अतिथि पूर्व सांसद अतुल राय ने कहा कि स्वामी सहजानंद सरस्वती केवल किसान नेता नहीं थे, बल्कि भारत के सामाजिक पुनर्जागरण के अग्रदूत थे। उन्होंने किसानों और गरीबों को केवल अधिकारों के लिए संघर्ष करना ही नहीं सिखाया, बल्कि आत्मसम्मान के साथ जीने की प्रेरणा भी दी। आज जब समाज अनेक चुनौतियों से जूझ रहा है, तब उनके विचार सामाजिक समरसता, न्याय और राष्ट्रहित की भावना को सशक्त करने का मार्ग दिखाते हैं।

उन्होंने युवाओं से स्वामी के जीवन से प्रेरणा लेकर समाज के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करने का आह्वान किया। मुख्य वक्ता स्वामी सहजानंद साहित्य के शोधकर्ता डॉ. राघव शरण शर्मा ने कहा कि स्वामी सहजानंद सरस्वती का व्यक्तित्व भारतीय इतिहास में अद्वितीय है। उन्होंने संन्यास को समाज से पलायन नहीं, बल्कि समाज के लिए समर्पण का माध्यम बनाया। स्वामी ने भारतीय अध्यात्म, गीता के कर्मयोग और किसान आंदोलन को एक सूत्र में पिरोकर यह सिद्ध किया कि सामाजिक न्याय और आध्यात्मिक चेतना एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने कहा कि स्वामी सहजानंद का साहित्य केवल इतिहास का दस्तावेज नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के भारत के लिए मार्गदर्शक है। विशिष्ट वक्ता डॉ. कुमकुम भारद्वाज ने कहा कि स्वामी सहजानंद सरस्वती ने सामाजिक समानता, मानवीय गरिमा और सेवा को अपने जीवन का आधार बनाया।

उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसके अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के सम्मान और अधिकारों की रक्षा में निहित होती है। स्वामी जी का जीवन हमें संवेदनशील, न्यायप्रिय और कर्तव्यनिष्ठ बनने की प्रेरणा देता है।स्वागत भाषण अधिवक्ता मारुति कुमार राय ने कहा कि स्वामी सहजानंद सरस्वती केवल एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि एक जीवंत विचारधारा हैं। उन्होंने कहा कि समाज तभी आगे बढ़ेगा जब स्वामी जी के त्याग, सत्यनिष्ठा, निर्भीकता और लोककल्याण की भावना को नई पीढ़ी तक पहुँचाया जाएगा। विनोद राय ने न्यास एवं न्यासियों का परिचय प्रस्तुत किया।गोष्ठी में दिनेश चौधरी, राजेश राय ‘बागी’ एवं शेषनाथ राय, अधिवक्ता आदि रहे। इस अवसर पर विपुल राय, रासबिहारी राय, ओम नारायण प्रधान, शिवशंकर राय, शशिधर राय, रवींद्र शर्मा, निराला राय, विकास ठाकुर, मुकेश राय, कृष्णानंद राय, विनोद राय, राजेंद्र राय सहित बड़ी संख्या में शिक्षाविद, अधिवक्तागण, समाजसेवी, छात्र-छात्राएँ एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। संचालन अरुण राय तथा आभार ज्ञापन राम आश्रय राय ने व्यक्त किया।

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