
गाजीपुर। राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ जनपद न्यायालय सभागार में प्रशासनिक न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी एवं न्यायाधीश धर्मेन्द्र कुमार पाण्डेय ने मां सरवस्ती के मूर्ति पर पुष्प अर्पित कर दीप प्रज्जवलित कर किया । न्यायामूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने कहा कि भारत वर्ष में सभी तरह के त्यौहार होते है। एक सामाजिक त्यौहार, धार्मिक त्यौहार एवं राष्ट्रीय पर्व परन्तु जो आज का पर्व है न्याय का पर्व है। एक ऐसा पर्व है जो हमारे देश की जो प्राचीन सभ्यता रही, जहां कोई भी वाद पहले स्तर पर परिवार के मुखियॉ द्वारा फिर गॉव के मुखियॉ के द्वारा गॉव के मंच, पंच के द्वारा आपसी समझौते से निर्धारित किया जाता था। उसी परम्परा को एक न्यायिक चेहरा देने के लिए एक अधिनियम की स्थापना हुई, परन्तु वर्ष में राष्ट्रीय स्तर पर एक साथ राष्ट्र के सभी जिलो के राष्ट्रीय लोक अदालत का करने के फैसला किया गया। इसके पिछे की मंशा यह रही की देखा भी गया जब भी कोई वादकारी अपना वाद न्यायालय के समक्ष आता है जो प्रक्रिया की जटिलता है। इसके कारण कभी कभी छोटे वाद भी लम्बे समय तक निर्णय लेने के लिए न्यायालय में लम्बित पड़ जाते है। इसलिए इस पर्व लाया गया कि आज उस जटिलता से दूर, उस वाधता से दूर, जहा जज परिवार की मुखियॉ की तरह और आपसे उम्मीद लगाता हुआ कि आप अपने वाद को आपस में बैठक कर निर्धारित करा सके। वाहन चालान की संख्या में बहुत दिन तक लम्बित हो जाते थे वहा चालान अब आन लाईन या लोक अदालत में पहुचकर लम्बित चालानो को पूरा किया जाता है। ग्रामीण इलाको में बैक से जो लोन लिया जाता था जिसका व्याज बढ़कर ज्यादा हो जाता है जो गरीब किसान न भर पाने से राष्ट्रीय लोक अदालत में उनके व्याज मॉफ करके उनका लोन भर दिया जाता है। उन्होने कहा कि लोक अदालत सुलह समझौते के माध्यम से आपसी वैमनस्य को समाप्त करने का एक महत्वपूर्ण साधन है। उनके द्वारा यह कहा गया कि सम्पूर्ण न्यायपालिका कतार में खड़े अंतिम व्यक्ति तक न्याय व्यवस्था का लाभ पहुँचाने हेतु प्रतिबद्ध है।जनपद न्यायाधीश धर्मेन्द्र कुमार पाण्डेय ने कहा कि लोक अदालत से जहाँ एक ओर समय की बचत होती है, वहीं लम्बे समय से लम्बित मामलों के त्वरित निस्तारण का यह एक अत्यन्त महत्वपूर्ण साधन है। उन्होने कहा कि जब लोक अदालत के माध्यम से किसी मामले का निस्तारण होता है तब उसके विरूद्ध कोई अपील नहीं होती है और विवाद हमेशा के लिए समाप्त हो जाता है। इस अवसर पर नोडल अधिकारी, राष्ट्रीय लोक अदालत शक्ति सिंह अपर जिला जज कोर्ट संख्या-एक ने कहा कि ऐसे छोटे प्रकरण जिसमें अनावश्यक रुप से मुकदमेबाजी के कारण पक्षकारों के मध्य वैमनस्यता विद्यमान रहती है, को समाप्त कर सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाने में लोक अदालत द्वारा अपनी सक्रिय भूमिका निभायी जा रही है।

जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत न्यायपालिका, प्रशासन एवं पुलिस के समन्वय से मामलों के निस्तारण का जीवन्त उदाहरण है। पुलिस अधीक्षक डा० ईरज राजा ने कहा कि पुलिस द्वारा लोक अदालत की सफलता हेतु शत प्रतिशत नोटिसों का तामिला कराया गया है।आज की राष्ट्रीय लोक अदालत में वृद्धा, दिव्यांग एवं विधवा पेंशन हेतु एक शिविर भी लगाया गया। इस अवसर पर मेडिकल कैम्प का भी आयोजन किया गया। जिसमें विभिन्न रोगों के विशेषज्ञ डाक्टर मौजूद रहे। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय लोक अदालत के अवसर पर बिजली बिल, गृहकर एवं जल कर सहित अन्य सामाजिक योजनाओं से सम्बंधित पाण्डाल भी लगाये गये हैं। प्रशासनिक न्यायमूर्ति ने कुछ दिव्यांगजनों को व्हील चेयर/बैसाखी आदि का वितरण भी किया । नीरज गोंड, सचिव पूर्णकालिक जिला विधिक सेवा प्राधिकरण,ने कहा कि इस राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 01 लाख 24 हजार 587 मामले निस्तारित किये गये। बैंक द्वारा कुल 04 करोड़ 38 लाख 55 हजार 223 रुपये के एन.पी.ए. मामले निस्तारित किये गये। परिवार न्यायालय द्वारा कुल 06 विवाहित जोड़ो की सुलह कराकर विदाई करायी गयी। आज की लोक अदालत में अपर जिला जज कोर्ट संख्या-01 में 10 वर्ष से लम्बित अत्यंत प्राचीनतम सिविल अपील भी निस्तारित की गयी।इस अवसर पर प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय शैलोज चन्द्रा, पी.ओ. एम.ए.सी.टी. श्री संजय हरिशुक्का, अपर जिला जज अली रजा, अभिमन्यू सिंह, रामअवतार प्रसाद, संजय कुमार लाल, विजय कुमार, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नूतन द्विवेदी सहित समस्त न्यायिक अधिकारीगण, सिविल बार के सचिव अंजनी ठाकुर, वाहय न्यायालय सैदपुर, मुहम्मदाबाद, ग्राम न्यायालय जखनियों, जमानियों, बार के पदाधिकारीगण, न्यायालय के कर्मचारीगण एवं वादकारी उपस्थित रहे। संचालन सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण नीरज गोंड़ ने किया ।




