
गाजीपुर। साहित्य चेतना समाज की ओर से ‘चेतना प्रवाह’ कार्यक्रम के तहत महारानी लक्ष्मीबाई बालिका इण्टर कॉलेज की पूर्व प्रधानाचार्य डॉ. शकुंतला राय के आवास पर काव्य-गोष्ठी का आयोजन किया गया। शुभारंभ संजय कुमार पाण्डेय के सरस्वती वंदना से हुआ। मनोज यादव बेफिक्र ने अपनी ये पंक्तियाँ ‘ मेरी चीख बातों को समझना ।मेरे रुदन को हंसी में बदलना। मेरे लिए खुद कांटों पर चलना। कहीं जिक्र जब इसकी की जाती है । मां !तेरी याद बहुत आती है। कवि गोपाल गौरव ने अपनी प्रसिद्ध गजल ‘यह मुश्विरा है फकत तुम ना राम-राम करो। लगी है प्यास तो पानी का इंतजाम करो।’ कवि दिनेश चंद्र शर्मा ने अपनी कविता ‘ लेगा जमाना खून के एक-एक बूंद का बदला । कातिल को कत्लेआम से थकने तो दीजिए।।’ भजन गायक और कवि अभिमन्यु सिंह यादव ने ‘दिल की पाजेब में यह छनन -छनन है जब तक ।हम भी गाएंगे गजल कहने का फन है जब तक ‘ सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कवि कुमार नागेश ने अपने मखमली ने ‘ऐ मेरे दिल तुम जी कभी मुख्तसर आराम कर। अपने हिस्से में कभी इक मयकदे की शाम कर।’ हास्य और व्यंग्य के कवि आशुतोष श्रीवास्तव ने चुनाव पर व्यंग्य करते हुए सुनाया ‘ अबकि चुनाव में गिद्ध और शेरों ने साथ ही भाग्य आजमाया। शेरों से गिद्धों ने बाजी मार ली उनका क्षेत्र जो ठहरा।’ डॉ. संतोष कुमार तिवारी ने अपनी कविता ‘बूढ़ी दादी’ की इन पंक्तियों को सुनाया ‘कोने बैठी, बूढी दादी। देख रही ,पोते के नखरे। कान न सुनता पैर न मुड़ता। बाकी बचे न मुंह में दांत। ऐनक से झांके वे दिन में। तारे गिनती सारी रात’ ।साहित्य चेतना समाज के संस्थापक अमरनाथ तिवारी ‘अमर’ ने ‘आगे बढ़ते उत्साही को ,कब रोक सकी दुर्गम राहें। मंजिल खुद उसे बुलाती है फैला करके दोनों बाहें’ सुनाकर श्रोताओं की ढेर सारी वाहवाही लूटी।संजय पाण्डेय ने थोड़ा भी ना शर्मा, भरपेट यहां खाओ। तुम जाते ही रहते हो जब तक ना कोई टोके ,अब रहने भी दो तुम थोड़ा भी शरमाओ। ‘इस अवसर पर साहित्य चेतना समाज के संगठन सचिव प्रभाकर त्रिपाठी, सेवानिवृत्त हिंदी शिक्षिका विनीता राय, अर्चना राय, ज्योति उपाध्याय, शैल्वी राय ,मृगेन्द्र कुमार राय उपस्थित रही । संचालन डी.ए.वी.इण्टर कालेज के हिन्दी शिक्षक डा.संतोष कुमार तिवारी एवं धन्यवाद ज्ञापन अमरनाथ तिवारी ‘अमर’ ने किया।




