Wednesday, April 29, 2026

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डीएम – एसपी ने रिमोट का बटन दबाकर रावण का दहन किया

गाजीपुर। अति प्राचीन श्री रामलीला कमेटी हरिशंकरी की ओर से लीला 16 में दिन दो अक्टूबर को रामलीला मैदान लंका में रावण वध विजयदशमी का मंचन किया गया।राम रावण युद्ध में प्रभु श्री राम ने रावण का वध किया । कमेटी के संरक्षक एवं जिलाधिकारी अविनाश कुमार एवं कमेटी के सह संरक्षक तथा पुलिस अधीक्षक डॉ. ईरज राजा ने बटन दबाकर रावण के पुतले का दहन किया। मालूम हो कि मेघनाथ कुंभकरण के मारे जाने के बाद लंका नरेश महाराज रावण क्रोधित होकर राम से युद्ध करने चतुरंगिणी सेवा के साथ चल देता है। युद्धभूमि में पहुंचकर राम लक्ष्मण को ललकारता है। उसकी ललकार सुनकर श्री राम लक्ष्मण महाराज रावणको बहुत प्रकार से समझते हैं कहते हैं कि है रावण मैं आपको अंतिम चेतावनी देता हूं कि सीता को आदर पूर्वक मेरे हवाले कर दो और कुशलपूर्वक आप अपने लंका वासियो के साथ अपने राज्य में निवास करो लेकिन राम के बाद को अनसुनी करके रावण कहता है कि अगर आप क्षत्रिय वंशज के हो तो आप हमसे युद्ध करो और अपनी पत्नी सीता को लंका से ले जाओ।

रावण के बात को सुनकर राम लक्ष्मण अपनी बानरी सेनाओ के साथ युद्ध भूमि में आते हैं। दोनों दलों में घमासान युद्ध शुरू हो जाता है। श्री राम ने रावण को करने के लिए बाणों की वर्षा शुरू कर देते हैं फिर भी रावण के ऊपर बालों का कोई असर नहीं होता है अंत में रावण के छोटे भाई विभीषण ने श्री राम के कानों के आकर पास आकर श्री राम से कहते हैं की प्रभु लंका नरेश महाराज रावण के नाभि में अमृत है अतः आप आप अग्निबाण प्रयोग करें। विभिषण की बात को सुनकर श्री राम ने अग्निबाण का अनुसंधान करके रावण के ऊपर चलाया। अग्निबाण नाभि में लगते ही रावण ही राम कहके धराशाई हो जाता है। उसके दर्शन होने के बाद श्री राम ने अपने छोटे भाई लक्ष्मण को बुलाकर के कहते हैं कि है लक्ष्मण रावण शिव भक्त और प्रकांड विद्वान राजनीतिज्ञ हैं। अतः तुम उसके पास जाकर राजनीतिक विद्या सीखो अपने बड़े भाई श्री राम की बात को सुनकर लक्ष्मण जी महाराज रावण के पास जाकर उसके सिरके पास खड़े हो जाते हैं। जिससे वह लक्ष्मण को नहीं देख सका। लक्ष्मण जी वापस बड़े भाई श्री राम के पास आकर के कहते हैं कि महाराज रावण ने मुझे कुछ भी नहीं बताया। लक्ष्मण के बात को सुनकर श्री राम उनसे पूछते हैं कि आप महाराज रावण के पास गए थे वहां जाकर किधर खड़े थे तब लक्ष्मण ने श्री राम से कहा कि भैया मैं तो रावण के सिर के पास खड़ा था। लक्ष्मण की बात को सुनकर राम लक्ष्मण को लेकर महाराज रावण के पास जाते हैं और शिव भक्त महाराज रावण को हाथ जोड़कर प्रणाम करते हैं। रावण ने श्री राम लक्ष्मण को दिखा तो उसने कहा कि हे राम आप आ गए। मैं आपको राजनीति के बारे में बताता हूं कि जहां सुमति तहां संपत्ति नाना। जहां कुमति तहां विपत्ति निदान। राम हे राम जिस घर में सुमति है वहां लक्ष्मी का वास होता है और जहां जिस घर में कुमति है वहां लक्ष्मी भी चाह करके भी नहीं रुकती है और परिवार में विघटन हो जाता है बस देख लो हमको भाई विभीषण ने हमको अनेकों प्रकार से समझने की चेष्टा किया कि युद्ध न होने पाए लेकिन मैंने आवेश में आकर उसे लात से मार कर मैंने अपने राज्य से निष्कासित कर दिया और वह आपके साथ चला गया और हमारा राज्य आपको बता दिया जिससे आप मुझे अपने अग्निबाण से मेरे नाभि के अमित को सुखा दिया अमृत सुखते ही मैं धराशाई हो गया। मैं अपनों को ठुकराया और आपने दूसरों को अपनाया यही कारण है कि मैं आपसे मर गया इतना कहने के बाद रावण प्रभु श्री राम को प्रणाम करने के साथ अपने नश्वर शरीरको प्रभु श्री राम के सामने ही त्याग देता है। रावण के धराशाई होते ही पूरा लंका का मैदान जय श्री राम और हर हर महादेव के नारों से मेला स्थल गूंज उठा।

रावण के पुतले का दहन होने के पश्चात जिलाधिकारी ने जनपद वासियों को विजयदशमी की बधाई दी। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी के रूप में आज मैं यहां पहली बार शामिल हुआ हूं। काफी आध्यात्मिक एहसास हुआ है। यहां पर जिस तरह से लोग इकट्ठा होते हैं लोगों की भगवान श्री राम में आस्था प्रदर्शित करता है। मुझे काफी अच्छी अनुभूति हुई है। पुलिस अधीक्षक डॉक्टर ईरज राजा ने कहा कि बहुत भारी संख्या में भीड़ यहां आई। लोगों की आस्था जुडी हुई है। लंका मैदान को कई सेक्टर में बांटा गया था। जगह जगह फोर्स की तैनाती की गई थी। रावण दहन के दौरान लाखों की संख्या में लोग मौजूद रहे। इस अवसर पर कमेटी के कार्यवाहक अध्यक्ष विनय कुमार सिंह, उपाध्यक्ष गोपाल जी पांडेय, मंत्री ओमप्रकाश तिवारी, संयुक्त मंत्री लक्ष्मी नारायण, उप मंत्री लव कुमार त्रिवेदी, प्रबंधक मनोज कुमार तिवारी, उप प्रबंधक मयंक तिवारी, अनुज अग्रवाल, राजेश प्रसाद, अशोक कुमार अग्रवाल, प्रमोद कुमार गुप्ता, राजेंद्र विक्रम सिंह, अजय पाठक, सुधीर कुमार अग्रवाल, अजय कुमार अग्रवाल, कृष्णांश त्रिवेदी के अलावा कई प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे।

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