Thursday, August 6, 2026

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साहित्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं,अपितु समाज को सही दिशा देने का माध्यमः अमरनाथ

गाजीपुर। साहित्य चेतना समाज के तत्वावधान में ‘चेतना-प्रवाह’ कार्यक्रम के तहत उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचन्द की जयंती पर नगर के सहकारी कालोनी, स्थित संजीव त्रिपाठी के आवास पर विचार-गोष्ठी एवं कवि-गोष्ठी की गई।कार्यक्रम का शुभारंभ मुंशी प्रेमचन्द के चित्र पर माल्यार्पण से हुआ। विचार-गोष्ठी में डा.ॠचा राय ने कहा कि प्रेमचन्द ने अपने साहित्य के माध्यम से समाज के उस वर्ग की आवाज को शब्द दिए,जिसकी पीड़ा अनसुनी रह जाती थी।उनके उपन्यास गोदान,गबन,निर्मला,रंगभूमि और कर्मभूमि आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने अपने समय में थे।उनकी कहानियाँ ईदगाह,पूस की रात,कफन,दो बैलों की कथा और पंच परमेश्वर मानवीय मूल्यों के जीवंत चित्र प्रस्तुत करती हैं।साहित्य चेतना समाज के संस्थापक अमरनाथ तिवारी अमर ने कहा कि प्रेमचन्द का मानना था कि साहित्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं,अपितु समाज को सही दिशा देने का माध्यम है।किसान,मजदूर,महिलाएँ,दलित,शोषित और वंचित वर्ग प्रेमचन्द के साहित्य के केंद्र में रहे।उनकी रचनाएँ हमें सत्य,न्याय,समानता और मानवीय संवेदना का संदेश देती हैं।डा.सन्तोष सिंह ने कहा कि प्रेमचन्द हिन्दी साहित्य के पहले ऐसे कालजयी साहित्यकार हैं , जिन्होंने कथा साहित्य को सामान्य जनजीवन के वास्तविक सरोकारों से जोड़ा । उनका साहित्य एक ओर तत्कालीन सामाजिक विसंगतियों को अनावृत करता है , तो वहीं दूसरी ओर वह मानव मन की अतल गहराइयों में प्रवेश कर व्यक्ति मन का मनोविश्लेषण करता है । पत्रकारिता के क्षेत्र में भी अपनी ‘ हंस ‘ पत्रिका के माध्यम से प्रेमचन्द ने तत्कालीन पराधीन भारत के जनमानस को आजादी और समाज सुधार के जागरूक किया । उन्होंने कहा था कि ‘ साहित्य राजनीति के पीछे चलने वाली सचाई नहीं , बल्कि राजनीति के आगे चलने वाली वह मशाल है । जिससे समाज दिशानिर्देशित होता है ।द्वितीय चरण में हुई कवि-गोष्ठी में कवि शशांक शेखर पाण्डेय ने ‘टिम टिम करते ये तारे/लगते हैं कितने प्यारे/रातों को अम्बर में जैसे/जूगनू लगते हैं सारे’ सुनाकर श्रोताओं को आनन्दित किया।अमरनाथ तिवारी अमर ने ‘परहित में जो जीता प्रतिपल/उसका ही जीवन हुआ सफल/औरों को सुधा पीला करके/शंकर-सा पीता स्वयं गरल’ सुनाकर जीवन दर्शन को परिभाषित किया। कवि दिनेश चन्द्र शर्मा ने ‘आग नफरत की तुम तो लगाते रहे/हम इस को बुझाते रहे’। इस मौके पर गीतकार नागेश मिश्र, हण्टर गाजीपुरी ,कन्हैया लाल विचारक,संजय पाण्डेय, संस्था के संगठन सचिव प्रभाकर त्रिपाठी,मनोज विश्वकर्मा,प्रेम प्रकाश त्रिवेदी,प्रवीण कुमार तिवारी,पंकज त्रिपाठी,यश त्रिपाठी,चार्विक त्रिपाठी आदि उपस्थित थे। धन्यवाद ज्ञापन संजीव त्रिपाठी ने किया। अध्यक्षता प्राचार्य डा.सन्तोष सिंह एवं संचालन डा.ॠचा राय ने किया।

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